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मोयामोया की देखभाल · भारत

मोयामोयाएंजियोपैथी

मोयामोया रोग से जूझ रहे मरीज़ों के लिए हमदर्दी भरी जाँच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और हर मरीज़ के मुताबिक़ इलाज।

आप अकेले नहीं हैं, और मोयामोया का इलाज संभव है। चलिए, एक-एक कदम साथ चलते हैं।

  • जापान में प्रशिक्षित
  • बच्चे और बड़े
  • हिंदी · English
एक उदाहरण कहानीदृश्य 1/6

एक सामान्य, व्यस्त ज़िंदगी

मीरा, 27 साल, स्वस्थ और सक्रिय है — काम, दोस्त, परिवार और सुबह की चाय।

यह एक उदाहरण कहानी है। हर मरीज़ अलग होता है — अपनी देखभाल के बारे में टीम से बात करें।

जानने लायक बातें

सबसे पहले ये चार बातें जान लें

  • इसका इलाज संभव है

    सर्जिकल रिवैस्क्युलराइज़ेशन सबसे असरदार इलाज है। यह दिमाग़ में खून का बहाव बहाल करता है और भविष्य में स्ट्रोक का ख़तरा काफ़ी घटा देता है।

  • तुरंत जान का ख़तरा नहीं

    मोयामोया से तुरंत जान का ख़तरा नहीं होता। समय पर इलाज हो जाए तो जीवन अवधि आम लोगों जैसी ही होती है।

  • सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित है

    अनुभवी सेरेब्रोवैस्कुलर न्यूरोसर्जन द्वारा की जाने पर रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित होती है और इसकी सफलता दर ऊँची है।

  • रिकवरी जल्दी होती है

    आमतौर पर 5–7 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है। ज़्यादातर मरीज़ 4–6 हफ़्तों में सामान्य गतिविधियाँ शुरू कर देते हैं।

आसान भाषा में समझें

मोयामोया क्या है?

आसान शब्दों में: दिमाग़ की मुख्य धमनियाँ धीरे-धीरे सिकुड़ती हैं, इसलिए शरीर खून का बहाव बनाए रखने के लिए नन्ही नई नसें बना लेता है। स्कैन में ये ‘धुएँ के गुबार’ जैसी दिखती हैं, और जापानी में मोयामोया का मतलब यही है।

यह एक ऐसा रोग है जिसमें दिमाग़ को खून पहुँचाने वाली बड़ी धमनियाँ धीरे-धीरे बंद हो जाती हैं, जिससे स्ट्रोक होते हैं। दिमाग़ तक खून पहुँचाने की कोशिश में शरीर सहायक (collateral) नसों का जाल बना लेता है।

सिर के अंदर क्या होता है

सेहतमंदमोयामोया

सेहतमंद: मुख्य धमनी पूरी खुली है। खून आसानी से दिमाग़ तक पहुँचता है।

  • डाई से भरी धमनियाँ
  • सिकुड़ी / बंद धमनी
  • नन्ही नई नसें (‘धुएँ का गुबार’)
  • दिमाग़ · मुख्य धमनी

इसे पानी के पाइप की तरह समझें जो धीरे-धीरे बंद हो रहा है: नल तक कम पानी पहुँचता है, इसलिए शरीर दिमाग़ तक खून पहुँचाने के लिए छोटे-छोटे बगल के रास्ते खोल लेता है।

पूरी चिकित्सकीय जानकारी पढ़ें

इसकी सबसे आम पहचान है बार-बार स्ट्रोक आना (हाथ या पैर में कमज़ोरी, चेहरा टेढ़ा होना, बोली लड़खड़ाना या आवाज़ चले जाना, खाली नज़र से ताकना या बेहोश होना) — और यह बच्चों व बड़ों दोनों को होता है। मरीज़ थोड़े समय में स्ट्रोक से उभर जाते हैं (इसे ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक – TIA कहते हैं)। कभी-कभी दिमाग़ में खून की कमी या खून बहने से बड़ा स्ट्रोक हो जाता है। कुछ मरीज़ों में सिर्फ़ ऐसा सिरदर्द होता है जो किसी दवा से नहीं जाता।

इस्केमिक मोयामोया

खून की कमी से

जब सहायक नसें दिमाग़ को पर्याप्त खून नहीं पहुँचा पातीं, तो स्ट्रोक होता है।

  • छोटा स्ट्रोक (ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक – TIA). हाथ-पैर में थोड़े समय की कमज़ोरी, चेहरा टेढ़ा होना या बोलने में दिक़्क़त, जो कुछ समय बाद ठीक हो जाती है।
  • बड़ा स्ट्रोक. हाथ-पैर की लगभग स्थायी कमज़ोरी या आवाज़ चले जाना।
  • सोचने-समझने की क्षमता में कमी. पढ़ाई में कमज़ोरी या बुद्धि कम होना; बार-बार स्ट्रोक और दिमाग़ को लगातार कम खून मिलने से होता है।

हेमरेजिक मोयामोया

दिमाग़ में खून बहने से

कभी-कभार सहायक नसें फूल जाती हैं और फट जाती हैं, जिससे दिमाग़ में खून बहने लगता है।

  • अचानक स्ट्रोक. अचानक छोटा या बड़ा स्ट्रोक होता है, और हर मरीज़ में ठीक होने की मात्रा और गति अलग-अलग होती है।
  • ज़्यादातर बड़ों में. खून बहने वाला (हेमरेजिक) स्ट्रोक वयस्कों में होता है।

यह किसे हो सकता है?

  • मोयामोया बच्चों और बड़ों दोनों को होता है।
  • बच्चों और बड़ों दोनों को इस्केमिक (खून की कमी वाला) स्ट्रोक हो सकता है।
  • हेमरेजिक स्ट्रोक वयस्कों में होता है।
मोयामोया एंजियोपैथी की पहचान — दिमाग़ की एंजियोग्राम (DSA) में दिखता नन्ही सहायक नसों का घना ‘धुएँ के गुबार’ जैसा जाल‘धुएँ का गुबार’
यह मोयामोया के मरीज़ की असली एंजियोग्राम तस्वीर है — नन्ही नसों का यह घना जाल ही इसकी पहचान है, यानी ‘धुएँ का गुबार’।

इन लक्षणों पर ध्यान दें

आम लक्षण

इनमें से कोई भी लक्षण, ख़ासकर अगर बार-बार हो, तो मोयामोया की जाँच करानी चाहिए। ज़्यादातर लक्षण जल्दी ठीक हो जाते हैं, और इसीलिए ये आसानी से छूट जाते हैं।

  • ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक (TIA)

    छोटे स्ट्रोक — हाथ-पैर की ऐसी कमज़ोरी जो थोड़े समय में ठीक हो जाए।

  • हाथ-पैर में आती-जाती कमज़ोरी

    छोटे स्ट्रोक — हाथ या पैर अचानक कमज़ोर पड़ जाता है, फिर ताक़त लौट आती है।

  • हाथ-पैर का काँपना

    लिम्ब-शेकिंग TIA — हाथ या पैर का बार-बार, अपने आप काँपना।

  • हाथ-पैर में स्थायी कमज़ोरी

    बड़े स्ट्रोक के बाद किसी हाथ या पैर की लगातार कमज़ोरी।

  • बोलने में दिक़्क़त या आवाज़ चले जाना

    लड़खड़ाती, अटकती या बंद हो चुकी बोली।

  • सिरदर्द, माइग्रेन

    धड़कता हुआ या लगातार बना रहने वाला सिरदर्द।

  • दौरे (मिर्गी जैसे झटके)

    अचानक असामान्य हरकतें या होश खो देना।

  • एकटक देखना, धुंधला दिखना

    खाली-खाली, बिना प्रतिक्रिया ताकना या थोड़े समय के लिए धुंधला दिखना।

  • बार-बार बेहोशी / अचानक गिर पड़ना

    अचानक होश खो देना या गिर जाना।

किसी लक्षण का दिखना सबसे बुरे की निशानी नहीं है। इसका मतलब बस इतना है कि विशेषज्ञ से एक बार बात कर लेनी चाहिए।

जाँच कब करानी चाहिए?

चूँकि मिनी-स्ट्रोक जल्दी ठीक हो जाते हैं, इनके लक्षण अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। ये स्थितियाँ — ख़ासकर बच्चों में — शक पैदा करनी चाहिए।

बार-बार आते-जाते छोटे स्ट्रोक

मरीज़ हाथ-पैर में कमज़ोरी की शिकायत करते हैं या घरवालों को दिखती है। यह थोड़े समय में ठीक हो जाती है, इसलिए क्लिनिक में जाँच के समय मरीज़ सामान्य लग सकता है। बच्चों में माता-पिता और डॉक्टर इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। बच्चों और बड़ों में ऐसे बार-बार होने वाले एपिसोड पर मोयामोया एंजियोपैथी का शक ज़रूर करना चाहिए।

पानी की कमी के बाद स्ट्रोक

शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के बाद हाथ-पैर में कमज़ोरी:

  • बुख़ार, उल्टी या दस्त के दौरान
  • ज़्यादा मेहनत से बहुत पसीना आने पर
  • कम पानी पीना, ख़ासकर सफ़र में और गर्मी के मौसम में

तेज़ साँस लेने के बाद स्ट्रोक

इन स्थितियों में होने वाला स्ट्रोक:

  • बच्चों का बहुत ज़्यादा रोना
  • तीखा खाना खाने के बाद गहरी साँसें लेना
  • तैरते समय और तेज़ खेल-कूद में गहरी साँसें लेना

आपके इलाज के चरण

आगे क्या होता है, कदम-दर-कदम

ज़्यादातर लोग इन्हीं चार चरणों से गुज़रते हैं। हर चरण में हम आपके साथ हैं।

  1. 01

    परामर्श

    टीम से मिलें, अपनी बीमारी का इतिहास और पुराने स्कैन साझा करें। अनुभवी डॉक्टरों से जल्दी और सही जाँच कराने पर सबसे अच्छे नतीजे मिलते हैं।

  2. 02

    जाँच (स्कैन)

    जाँच आमतौर पर तीन इमेजिंग चरणों से होती है: दिमाग़ का MRI स्कैन, डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) और MR परफ़्यूज़न इमेजिंग।

    • दिमाग़ का MRI स्कैन

      MRI · FLAIR

    • दिमाग़ की डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA)

      DSA · ICA

    • MR परफ़्यूज़न इमेजिंग

      CBF नक्शा

    हर स्कैन क्या दिखाता है
    1. 1दिमाग़ का MRI स्कैनएक सुरक्षित जाँच जिसमें रेडिएशन नहीं होता और जो पुराने या हाल के स्ट्रोक दिखा देती है।
    2. 2दिमाग़ की डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA)डाई (रंग) नसों में फैलकर पहचान वाला ‘धुएँ का गुबार’ साफ़ दिखा देती है।
    3. 3MR परफ़्यूज़न इमेजिंगएक रंगीन नक्शा, जो दिखाता है कि दिमाग़ के किन हिस्सों को पूरा खून नहीं मिल रहा।
  3. 03

    रोज़ की देखभाल और दवाइयाँ

    खूब पानी पिएँ, ज़्यादा मेहनत से बचें और एक साधारण डायरी रखें। खून पतला करने वाली दवाइयाँ (एस्पिरिन और क्लोपिडोग्रेल) और सिलोस्टाज़ोल से मोयामोया एंजियोपैथी में सीमित फ़ायदा ही होता है।

    • खूब पानी पिएँ
    • ज़्यादा मेहनत और पसीने से बचें
    • बच्चे को शांत रखें
    • तैराकी जैसे तेज़ खेलों से बचें
    • तेज़ और गहरी साँसों से बचें
    • तीखा खाना न खाएँ
    • डायरी रखें

    खून पतला करने वाली दवाइयाँ (एस्पिरिन और क्लोपिडोग्रेल) और सिलोस्टाज़ोल से मोयामोया एंजियोपैथी में सीमित फ़ायदा ही होता है।

    रोज़ की देखभाल के सुझाव

    मोयामोया एंजियोपैथी एक दुर्लभ रोग है। जाँच में देरी से इलाज के नतीजे ख़राब हो सकते हैं। सही जाँच जल्द से जल्द कराना बहुत ज़रूरी है।

    • खूब पानी पिएँमरीज़ों को शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी जाती है।
    • ज़्यादा मेहनत और पसीने से बचेंबहुत पसीना शरीर का पानी सुखा देता है।
    • बच्चे को शांत रखेंलंबे समय तक रोने से रोकें — इससे अटैक हो सकता है।
    • तैराकी जैसे तेज़ खेलों से बचेंख़ासकर साँस रोकने से।
    • तेज़ और गहरी साँसों से बचेंज़्यादा मेहनत से होने वाली तेज़, गहरी साँसों से बचें।
    • तीखा खाना न खाएँइससे अपने आप गहरी साँसें चलने लगती हैं।
    • डायरी रखेंघटनाओं, ब्लड प्रेशर की रीडिंग और पानी की मात्रा का हिसाब लिखते रहें।
  4. 04

    सर्जरी और रिकवरी

    जल्दी रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी फ़ायदेमंद है। आमतौर पर 5–7 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है, और ज़्यादातर मरीज़ 4–6 हफ़्तों में सामान्य गतिविधियाँ शुरू कर देते हैं।

    डायरेक्ट · ब्रेन बायपास

    डायरेक्ट रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी (ब्रेन बायपास सर्जरी)

    सिर की एक नस (STA) को दिमाग़ की नस (MCA) से जोड़ दिया जाता है।

    इनडायरेक्ट · नई नसें

    इनडायरेक्ट रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी

    कुछ हफ़्तों में यह नन्ही नई नसें उगाता है — जड़ों की तरह।

    सर्जरी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा बड़े स्ट्रोक से पहले होता है, इससे पहले कि स्थायी नुकसान हो जाए — इसीलिए जल्दी जाँच इतनी ज़रूरी है।

    बायपास सर्जरी कैसे काम करती है
    • STA — सिर की नस
    • MCA — दिमाग़ की धमनी
    • एनास्टोमोसिस (जोड़)
    • बंद इंटरनल कैरोटिड

    डायरेक्ट रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी (ब्रेन बायपास सर्जरी)

    सिर की त्वचा (स्कैल्प) की एक छोटी नस लेकर उसे सर्जरी से दिमाग़ की नस से जोड़ दिया जाता है। इससे खून इंटरनल कैरोटिड धमनी की रुकावट को बायपास करके दिमाग़ तक पहुँच जाता है। यह तकनीकी रूप से कठिन सर्जरी हमेशा इनडायरेक्ट रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी के साथ की जाती है।

    इसे ऐसे समझें जैसे बंद सड़क के बगल से नया रास्ता बनाना: सिर की एक छोटी नस को सीधे दिमाग़ की नस से जोड़ देते हैं, ताकि खून तुरंत रुकावट के पार पहुँच जाए।

    • मांसपेशी / ड्यूरा / गैलिया
    • नई नसें
    • दिमाग़ की सतह

    इनडायरेक्ट रिवैस्क्युलराइज़ेशन सर्जरी

    दिमाग़ के पास के ऊतक — जैसे मांसपेशी (टेम्पोरालिस), ड्यूरा (दिमाग़ को ढकने वाली झिल्ली) और गैलिया (सिर की त्वचा का ऊतक) — को सर्जरी से दिमाग़ की सतह पर जोड़ दिया जाता है। इन ऊतकों से नई खून की नसें उगकर ऑक्सीजन की कमी से जूझते दिमाग़ को खून पहुँचाती हैं।

    जैसे नई घास जमाने के लिए ताज़ी घास-मिट्टी बिछाते हैं, वैसे ही पास का सेहतमंद ऊतक दिमाग़ पर रखा जाता है। आने वाले हफ़्तों में यह अपने आप दिमाग़ के अंदर नई खून की नसें उगा देता है।

अपने डॉक्टरों से मिलें

भरोसेमंद और अनुभवी हाथ

मोयामोया में विशेष अनुभव रखने वाले न्यूरोसर्जन, भारत और जापान में प्रशिक्षित।

प्रो. डॉ. बी. जयानंद सुधीर

प्रो. डॉ. बी. जयानंद सुधीर

सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन

यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद

प्रोफ़ेसर डॉ. बी. जयानंद सुधीर को न्यूरोसर्जरी में 16 साल से ज़्यादा और मोयामोया एंजियोपैथी के इलाज में 14 साल से ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने ब्रेन बायपास सर्जरी का प्रशिक्षण SCTIMST त्रिवेंद्रम, तथा जापान के सप्पोरो में होक्काइडो यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल और तेइशिनकाई हॉस्पिटल से प्राप्त किया है।

डॉ. बी. जयानंद सुधीर वर्तमान में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन हैं।

  • न्यूरोसर्जरी में 16+ साल
  • मोयामोया के इलाज में 14+ साल
  • ब्रेन बायपास प्रशिक्षण — SCTIMST, होक्काइडो यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल और तेइशिनकाई हॉस्पिटल, जापान
डॉ. वंशी रेड्डी पी

डॉ. वंशी रेड्डी पी

एसोसिएट कंसल्टेंट

न्यूरोसर्जरी

डॉ. वंशी रेड्डी पी. ने अपना न्यूरोसर्जरी प्रशिक्षण SCTIMST, त्रिवेंद्रम से पूरा किया और वर्तमान में एसोसिएट कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं।

  • न्यूरोसर्जरी प्रशिक्षण — SCTIMST, त्रिवेंद्रम

हमें कहाँ मिलें

मोयामोया एंजियोपैथी के लिए परामर्श यहाँ उपलब्ध है

  • हैदराबाद

    यशोदा हॉस्पिटल, मलकपेट

    रूम नं. 302, OP ब्लॉक, यशोदा हॉस्पिटल, मलकपेट, हैदराबाद, तेलंगाना
    रास्ता देखें
  • त्रिवेंद्रम

    सातोयामा

    सातोयामा, रमन लेन, रेमंड शोरूम के सामने, प्लामूडु, पट्टम, त्रिवेंद्रम, केरल
    रास्ता देखें
  • आदिलाबाद

    तिरुमला हॉस्पिटल

    तिरुमला हॉस्पिटल, आदिलाबाद नए बस स्टैंड के सामने, आदिलाबाद, तेलंगाना
    रास्ता देखें

आपके सवाल, हमारे जवाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मरीज़ और परिवार जो सवाल सबसे ज़्यादा पूछते हैं, उनके सीधे जवाब।

  • मोयामोया एक दुर्लभ रोग है जो धीरे-धीरे बढ़ता है। इसमें दिमाग़ को खून पहुँचाने वाली बड़ी धमनियाँ धीरे-धीरे सिकुड़ या बंद हो जाती हैं। इससे खून का बहाव घट जाता है और खून की रुकावट या दिमाग़ में खून बहने से स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है।

हमसे बात करें

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हैदराबाद, त्रिवेंद्रम और आदिलाबाद में अपॉइंटमेंट लेकर परामर्श।

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